डीएम के आदेश के 15 दिन बाद ही खुली भ्रष्टाचार की पोल! गंगाघाट पुल के गड्ढे फिर बने जानलेवा, घटिया मरम्मत पर उठे सवाल
उन्नाव/शुक्लागंज। कानपुर-लखनऊ मार्ग को जोड़ने वाले शुक्लागंज गंगाघाट पुल की बदहाल सड़क इन दिनों राहगीरों के लिए मुसीबत और हादसे का बड़ा कारण बनती जा रही है। लगातार हो रही बारिश के बीच पुल पर बने गहरे गड्ढे इसकी जर्जर हालत की कहानी बयां कर रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि जिन गड्ढों को जिला अधिकारी के आदेश पर महज करीब 15 दिन पहले ही भरवाया गया था, वे दोबारा उखड़ने लगे हैं।
ताजा तस्वीरें सामने आने के बाद पुल की मरम्मत में इस्तेमाल हुई सामग्री और कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सड़क की ऊपरी परत जगह-जगह से टूट चुकी है और बड़े गड्ढों में सड़क के नीचे लगी सरिया तक दिखाई देने लगी है। बारिश के पानी के बीच ये गड्ढे वाहन चालकों के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं हैं।
लाखों वाहनों की आवाजाही, फिर भी स्थायी समाधान नहीं
गंगाघाट पुल कानपुर और लखनऊ समेत आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। इस पुल से प्रतिदिन हजारों-लाखों छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे व्यस्त मार्ग पर बार-बार पैबंद लगाकर मरम्मत करना और कुछ ही दिनों में सड़क का फिर उखड़ जाना व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश शुरू होते ही पुल की हालत और भयावह हो जाती है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए गड्ढों से बचना बेहद मुश्किल है, जबकि तेज रफ्तार वाहनों के बीच अचानक गड्ढा सामने आने पर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
डीएम की साफ-सुथरी छवि को दागदार कर रहे गुणवत्ता विहीन काम?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिला अधिकारी के निर्देश पर कुछ दिन पहले ही इन गड्ढों की मरम्मत कराई गई थी, तो आखिर इतनी जल्दी सड़क दोबारा कैसे उखड़ गई? क्या मरम्मत कार्य में मानकों का पालन किया गया था? क्या संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों ने कार्य की गुणवत्ता की जांच की?
गुणवत्ता विहीन कार्यों की लंबी सूची कहीं न कहीं प्रशासन की साफ-सुथरी और जवाबदेह कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करती है। ऐसे में जिला प्रशासन को मामले का तत्काल संज्ञान लेकर मौके पर तकनीकी जांच करानी चाहिए और यदि निर्माण/मरम्मत कार्य में लापरवाही या मानकों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
जनता पूछ रही है—बार-बार मरम्मत या स्थायी समाधान?
अब सवाल सिर्फ गड्ढे भरने का नहीं, बल्कि स्थायी और गुणवत्तापूर्ण समाधान का है। जनता जानना चाहती है कि आखिर हर कुछ दिनों में होने वाली मरम्मत पर सरकारी धन खर्च होने के बावजूद सड़क क्यों नहीं टिक पा रही है?
प्रशासन से अपील है कि गंगाघाट पुल की मौजूदा स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल निरीक्षण कराया जाए, खतरनाक गड्ढों को सुरक्षित तरीके से दुरुस्त कराया जाए और हालिया मरम्मत कार्य की गुणवत्ता की जांच कराकर जिम्मेदारी तय की जाए।
क्योंकि यह महज सड़क का गड्ढा नहीं—यह रोज गुजरने वाले हजारों लोगों की जिंदगी से जुड़ा सवाल है।
