दरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) पर पहले भी यात्री सुविधाओं को लेकर गंभीर न होने के आरोप लगते रहे हैं। अधिकारी वीआइपी की सेवा-सुश्रुषा पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन आम श्रद्धालुओं से उनका कोई सरोकार नहीं।
अगर कोई दानी आम श्रद्धालुओं की सेवा करना चाहता है तो उसकी मंशा को भी वह फलीभूत नहीं होने देते। ऐसा ही डेढ़ दशक पूर्व ज्योतिर्मठ के तत्कालीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की ओर से मंदिर समिति को दिए गए टेंपो ट्रैवलर के मामले में हुआ।
यह वाहन बदरीनाथ धाम में वृद्ध, दिव्यांग व बीमार श्रद्धालुओं को निश्शुल्क मंदिर तक लाने-ले जाने के उपयोग में लाया जाना था, लेकिन कभी ऐसा जरूरी नहीं समझा गया।
बदरीनाथ धाम का विस्तार चार किमी से अधिक क्षेत्र में हो चुका है, लेकिन यहां कोई लोकल वाहन सेवा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यात्रियों को निजी वाहन या फिर पैदल ही क्षेत्र में आवाजाही करनी पड़ती है। वहीं, सड़क तंग होने के कारण वीआईपी के सिवा अन्य किसी को अपना वाहन मंदिर के पास साकेत तिराहे तक ले जाने की अनुमति नहीं है।
इसी को देखते हुए टेंपो ट्रैवलर वाहन मंदिर समिति को दान किया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ उद्घाटन वाले दिन ही इस वाहन से जरूरतमंद श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचाया गया। इसके बाद वाहन को सिर्फ वीआइपी को लाते-ले जाते देखा गया। साथ ही मंदिर समिति वाहन को निजी उपयोग में भी लाती रही।
बताया गया कि लंबे समय तक धाम में स्थित मंदिर समिति अध्यक्ष के आवास परिसर में खड़ा रहने के कारण बाद में यह वाहन निष्प्रयोज्य हो गया। इस बार यात्रा सीजन शुरू होते ही जब वर्तमान अध्यक्ष ने वाहन को लेकर जानकारी ली तो मंदिर समिति के अधिकारी हरकत में आए और उसे मरम्मत के लिए देहरादून ले गए।
बताया जा रहा कि अब इसे धाम में जरूरतमंदों को मंदिर तक पहुंचाने और कपाट बंद होने के बाद देहरादून व ऋषिकेश कार्यालय के कर्मचारियों के उपयोग में लाने की रणनीति बनाई गई है।
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#Uttarakhandविवेक त्रिपाठी स्टेट हेड चाणक्य न्यूज इंडिया उत्तराखंड 
