नगर आयुक्त की तानाशाही:* *व्यापार मंडल पहुंचा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग*
*अलीगढ़*।(*संजय सक्सेना ब्यूरो चीफ*)नगर निगम द्वारा नियम विरुद्ध आरोपित जल मूल्य एवं जल कर लगाकर लाखों निरीह नागरिकों को परेशानी में डालने का मामला अब पहुंचा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में,अपने को सही सिद्ध करने को चक्कर काट रही जनता,निगम द्वारा सही रिकॉर्ड न रखने का दंड भी जनता पर, भुगतान करने की अंतिम तिथि भी बढ़ाई जाए।उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की एक आवश्यक बैठक समर्पण कॉम्प्लेक्स रेलवे रोड पर प्रांतीय महामंत्री सतीश माहेश्वरी की अध्यक्षता में हुई।सतीश महेश्वरी ने व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि नगर निगम अधिकारी अपनी तानाशाही पर अडिग हैं अतःअब इस पूरे प्रकरण की शिकायत राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष से की गई है।किशन गुप्ता कोषाध्यक्ष ने इस शिकायत का स्वागत करते हुए कहा कि कैसी विचित्र बात है कि नगर निगम के अभिलेखों में इस बात को कोई रिकॉर्ड ही नहीं है कि उसने कितने पानी के कनेक्शन दिए हैं और उनके अभिलेखों की इस कमी को पूरा करने के लिए लाखों नागरिकों व्यापारियों को संकट में डाल दिया गया है।और वे अपने की सही सिद्ध करने के लिए नगर निगम में घंटों इंतजार कर आपत्ति लगा रहे हैं।जिनका निस्तारण नगर निगम 20-25दिन में भी नहीं कर पा रहा और और वहां के अधिकारी और कर्मचारी भी इस तरह के गलत कर आरोपण से परेशान हैं।वे भी जा रहे हैं आपत्ति की जांच करने और डरा कर की उनका पुनः निर्धारण होगा, अवैध वसूली की शिकायतें भी आई हैं।घनश्याम दास जैन महामंत्री ने कहा जब 200मीटर की परिधि में कोई पानी का कोई स्रोत ही नहीं है तो उपभोक्ता और जल कर कैसे आरोपित कर दिया। नगर आयुक्त ने इन सभी तथ्यों को स्वीकार तो किया परंतु निस्तारण केवल आपत्ति पर ही करने को ही कहा।संजय वार्ष्णेय वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने कहा गंभीर पक्ष यह भी है कि अनेक नागरिकों द्वारा जून माह में ही बिल जमा कर दिए और भुगतान के बाद नगर निगम ने लाखों बिल संशोधित कर दिए और अब आपत्ति लगानी पड़ रही हैं । और फिर निश्चित परिधि में बिना पानी के श्रोत पर भी इसके बाद जल कर बिल फिर संशोधित कर दिए।अतःप्रथम दृष्टया जन हित में बड़ी संख्या में नागरिकों के मानवाधिकारों को हनन करने का मामला बनता है जो कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के अंतर्गत समानता एवं मनमानी के विरुद्ध संरक्षण तथा अनुच्छेद 21 का घोर उल्लंघन है।व्यापार मंडल ने प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट्स एक्ट 1993 के अंतर्गत उचित कार्यवाही एवं सिफारिश की मांग आयोग से की है।साथ ही समय बद्ध सीमा में आपत्तियों का निस्तारण न कर पाने के कारण भुगतान करने की अंतिम तिथि भी 31जुलाई से बढ़ा कर 31अगस्त की जाय।बैठक में हनुमंतराम गांधी,दीपक कोरल वरिष्ठ उपाध्यक्ष,नवीन राठी,दाऊदयाल गुप्ता,पंकज गुप्ता,अनुपम वार्ष्णेय,संयोग मित्तल करण मित्तल,संदीप मित्तल,प्रशांत मित्तल,विकास शर्मा,गर्वित महेश्वरी इत्यादि मौजूद रहे।
