विवेक त्रिपाठी स्टेट हेड चाणक्य न्यूज इंडिया उत्तराखंड आयुर्वेद के क्षेत्र में देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश का 78 वर्ष की आयु में निधन हो गया। रुद्रपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से आयुर्वेद जगत के साथ-साथ उत्तराखंड के गदरपुर और आसपास के क्षेत्र में भी शोक की लहर दौड़ गई।
वैद्य बालेंदु प्रकाश केवल एक चिकित्सक नहीं, बल्कि आयुर्वेद को शोध, विज्ञान और आधुनिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने वाले एक समर्पित आयुर्वेदाचार्य और शोधकर्ता थे। रसशास्त्र चिकित्सा पद्धति में उनकी विशेष पहचान थी और उन्होंने जटिल रोगों के उपचार एवं शोध के क्षेत्र में लंबे समय तक काम किया।
आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1999 में पद्मश्री से सम्मानित किया था। वह राष्ट्रपति के मानद चिकित्सक के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे।
गदरपुर की धरती से निकलकर देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाले वैद्य बालेंदु प्रकाश ने अपने कार्यों से पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया। ग्राम रतनपुरा में उनके द्वारा स्थापित अस्पताल आयुर्वेदिक उपचार और शोध का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी मरीज उपचार के लिए पहुंचते थे।
उन्होंने पारंपरिक आयुर्वेद को केवल परंपरा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे शोध और वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़ाने का लगातार प्रयास किया। यही वजह है कि आने वाली पीढ़ियां उन्हें सिर्फ एक चिकित्सक के रूप में नहीं, बल्कि आयुर्वेद के लिए जीवन समर्पित करने वाले एक महान शोधकर्ता के रूप में याद करेंगी।
आज उत्तराखंड ने अपना एक ऐसा बेटा खो दिया है, जिसने अपनी प्रतिभा और सेवा से देशभर में प्रदेश का मान बढ़ाया।
वैद्य बालेंदु प्रकाश का जाना आयुर्वेद जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
उनकी सेवाएं, उनका शोध और आयुर्वेद के प्रति उनका समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा। 🙏🌿
ॐ शांति। 🕊️
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