उत्तराखंड के पावन तीर्थ हरिद्वार में स्थित बिल्केश्वर महादेव मंदिर अपनी प्राचीन मान्यताओं और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है
मंदिर परिसर में स्थित गौरी कुंड को लेकर ऐसी मान्यता है कि इसका पवित्र जल ग्रहण करने से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी हो सकती है और जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए इसी स्थान पर कठोर तपस्या की थी। कहा जाता है कि तपस्या के दौरान वे इसी कुंड का जल ग्रहण करती थीं, इसलिए इसे गौरी कुंड के नाम से जाना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस कुंड पर माता गौरी का विशेष आशीर्वाद है।
मान्यता है कि संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपति यदि मंदिर परिसर में श्रद्धापूर्वक गौरी कुंड का जल ग्रहण करें, तो उन्हें माता गौरी की कृपा प्राप्त होती है। विशेष बात यह है कि इस पवित्र जल को केवल मंदिर परिसर में ही ग्रहण किया जा सकता है, इसे बाहर ले जाने की अनुमति नहीं होती।
गौरी कुंड के दर्शन से पहले श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करते हैं। इसके बाद माता गौरी को लाल चुनरी, श्रृंगार सामग्री और पुष्प अर्पित कर अपनी मनोकामना व्यक्त करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थना मन को शांति देती है और इच्छाओं की पूर्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।
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