प्रभु श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमान जी को रामजन्मभूमि परिसर में वैकल्पिक गर्भगृह मंदिर में ही स्थान दिया गया है। अखंड ज्योति के साथ अब इसकी भी नियमित पूजा-अर्चना कराई जा रही है। वैकल्पिक गर्भगृह के निर्माण के समय इस प्रतिमा को परिसर की यज्ञशाला में रख दिया गया था।
उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के आदेश पर वर्ष 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की ओर से कराई गई रामजन्मभूमि परिसर की खोदाई में हनुमानजी की छोटी-सी एक मूर्ति भी मिली थी। तत्समय इसे विधिपूर्वक अस्थायी राम मंदिर (टेंट में) में रामलला के समीप प्रतिष्ठित कर प्रतिदिन सुबह-शाम विधि-विधान से पूजा कराई जाती थी।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद पांच अगस्त 2020 को भूमि पूजन हो जाने पर जब नींव खोदाई शुरू हुई, तो अस्थायी मंदिर में रखीं रामलला की प्रतिमा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 मार्च, 2020 को वैकल्पिक गर्भगृह में प्रतिष्ठित किया था। वहीं पर हनुमानजी की मूर्ति भी ले जाई गई थी।
राम मंदिर की 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा हो जाने के उपरांत नई प्रतिमा के साथ रामलला की पुरानी मूर्तियों को भी गर्भगृह में स्थापित किया गया था, परंतु खोदाई में मिली बजरंगबली की वह मूर्ति वैकल्पिक गर्भगृह में ही रखी रह गई। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने हनुमान जी के इस विग्रह की पूजा के लिए दो नए सहायक पुजारियों को नियुक्त कर रखा था।
पिछले काफी समय से यह मूर्ति वहीं रही। वैकल्पिक गर्भगृह के कायाकल्प के समय इसे यज्ञशाला में रखवा दिया गया। इस बीच गर्भगृह का निर्माण पूरा हो गया और कुछ महीने पूर्व अखंड ज्योति भी स्थापित हो गई, तो अब फिर से उस मूर्ति को वहीं रख कर पूजा शुरू करा दी गई है, जबकि पहले ट्रस्टियों ने इसे परकोटे के हनुमान मंदिर में स्थापित कराने की बात कही थी।
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