विवेक त्रिपाठी स्टेट हेड चाणक्य न्यूज इंडिया उत्तराखंड हरिद्वार श्री अवदेशानंद महाराज जी द्वारा हरिहर आश्रम मै कन्या पूजन — “गुप्त नवरात्रि” की पूर्णाहुति पर श्री हरिहर आश्रम, कनखल, हरिद्वार में आदिशक्ति पराम्बा की आराधना के साथ सम्पन्न हुआ भव्य कन्या-पूजन !! —
विवेक त्रिपाठी स्टेट हेड चाणक्य न्यूज इंडिया उत्तराखंड
हरिद्वार श्री अवदेशानंद महाराज जी द्वारा हरिहर आश्रम मै कन्या पूजन
— “गुप्त नवरात्रि” की पूर्णाहुति पर श्री हरिहर आश्रम, कनखल, हरिद्वार में आदिशक्ति पराम्बा की आराधना के साथ सम्पन्न हुआ भव्य कन्या-पूजन !! —
“सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते।।”
“आषाढ़ मास” की परम पुण्यमयी “गुप्त नवरात्रि” की पूर्णाहुति के पावन अवसर पर भगवान् श्रीदत्तात्रेय की अनुग्रह-स्थली श्रीपञ्चदशनाम जूना अखाड़ा की परम पावन आचार्यपीठ – श्री हरिहर आश्रम, कनखल (हरिद्वार) में लोकमंगल, विश्वशान्ति, धर्मसंरक्षण एवं आत्मकल्याण की मंगलकामना से समर्पित भव्य कन्या-पूजन एवं शक्ति-अर्चन का दिव्य आयोजन अत्यन्त श्रद्धा, भक्ति और वैदिक विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ।
यह पावन अनुष्ठान श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ अनन्तश्रीविभूषित जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर पूज्यपाद श्री स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज “पूज्य आचार्यश्री जी” के पावन सान्निध्य, दिव्य प्रेरणा एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। सम्पूर्ण आश्रम वैदिक मन्त्रों, देवीसूक्त, दुर्गासप्तशती के पावन श्लोकों, भगवती की स्तुतियों तथा भक्तिभाव से अनुप्राणित वातावरण में मानो स्वयं देवीमय हो उठा।
“सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ।।”
भारतीय सनातन परम्परा में “कन्या-पूजन” केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, अपितु आदिशक्ति के साक्षात् दर्शन का महोत्सव है। कन्या उस निष्कलुष चेतना का प्रतीक है – जिसमें करुणा है, पवित्रता है, मातृत्व है, सृजन है और स्वयं परब्रह्म की दिव्य शक्ति का प्रथम स्पन्दन विद्यमान है। शाक्तदर्शन के अनुसार सम्पूर्ण सृष्टि उसी एक पराम्बा की अभिव्यक्ति है – वही महामाया हैं, वही महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली हैं; वही ज्ञान हैं, वही शक्ति हैं, वही करुणा हैं और वही समस्त चराचर जगत् की अन्तर्यामिनी चेतना हैं।
वैदिक मन्त्रों के मध्य कन्याओं में भगवती जगदम्बा का विधिवत् आवाहन किया गया। उन्हें आद्याशक्ति पराम्बा का सजीव स्वरूप मानकर श्रद्धापूर्वक पाद-प्रक्षालन, पूजन, अर्चन, तिलक, पुष्पार्चन तथा सम्मानपूर्वक भोजन अर्पित किया गया। यह पूजन केवल परम्परा का निर्वाह नहीं था, बल्कि उस सनातन सत्य का साक्षात् उद्घोष था कि नारी ही शक्ति है, शक्ति ही सृष्टि है और सृष्टि ही ईश्वर की करुणामयी अभिव्यक्ति है।
इस अवसर पर अपने प्रेरक उद्बोधन में “पूज्य आचार्यश्री जी” ने कहा कि पराम्बा समस्त ब्रह्माण्ड की मूल चेतना हैं। उपनिषद् जिस परमब्रह्म का प्रतिपादन करते हैं, वही ब्रह्म जब अपनी अनन्त सृजनशक्ति के साथ अभिव्यक्त होता है, तब वही शक्ति भगवती के रूप में पूजित होती है। सम्पूर्ण दृश्य और अदृश्य जगत् उसी शक्ति का विस्तार है। अतः प्रत्येक कन्या में उसी दिव्य मातृशक्ति का अंश विद्यमान है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने नारी को केवल सम्मान का पात्र नहीं माना, बल्कि ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ के उद्घोष के साथ उसे देवत्व का आसन प्रदान किया है। कन्या-पूजन वस्तुतः मानवता को यह स्मरण कराता है कि जहाँ नारी का आदर है, वहीं संस्कृति जीवित रहती है; जहाँ मातृशक्ति का सम्मान है, वहीं धर्म, करुणा, समरसता और दिव्यता का प्रकाश स्थिर रहता है।
“पूज्य आचार्यश्री जी” ने कहा कि नवरात्रि की साधना केवल जप, तप, अनुष्ठान अथवा उपवास से पूर्ण नहीं होती; उसका वास्तविक परिपाक तब होता है, जब साधक प्रत्येक जीव में, प्रत्येक नारी में और विशेषतः प्रत्येक कन्या में भगवती के दिव्य स्वरूप का दर्शन करना सीखता है। शक्ति की उपासना का सर्वोच्च सोपान बाह्य पूजन नहीं, बल्कि जीवन में करुणा, पवित्रता, सेवा, मातृभाव और आत्मीयता का जागरण है।
पूज्यपाद “आचार्यश्री” ने कहा कि पराम्बा केवल मन्दिरों की प्रतिमा नहीं हैं; वे प्रत्येक धड़कन में स्पन्दित करुणा हैं, प्रत्येक प्राणी में विद्यमान चेतना हैं और समस्त विश्व को धारण करने वाली अनन्त महाशक्ति हैं। जब मनुष्य अपने भीतर अहंकार का विसर्जन कर प्रेम, सेवा और समर्पण का दीप प्रज्वलित करता है, तभी वह भगवती की वास्तविक उपासना करता है। यही “गुप्त नवरात्रि” का गूढ़ आध्यात्मिक संदेश है।
इस पावन अवसर पर आदरणीय श्री अरविन्द सिंघल जी,श्रीमती विनीता सिंघल जी, कैप्टन विनोद राय जी, आदरणीया श्रीमती सीमा राय जी, वैदिक ब्राह्मणगण, आश्रम के अधिकारीगण, अन्तेवासी ब्रह्मचारी, पूज्य साधु-सन्त तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तगण श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की गरिमा को श्री हरिहर आश्रम के प्रबन्धक पूज्य श्री स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी महाराज, पूज्य श्री स्वामी सोमदेव गिरि जी महाराज, पूज्य श्री स्वामी ज्ञानानन्द गिरि जी महाराज, वैदिक आचार्यवृन्द, अन्तेवासी ब्रह्मचारीगण तथा संस्था के समस्त अधिकारीगण की गरिमामयी सहभागिता ने और अधिक आलोकित किया।
“गुप्त नवरात्रि” की पूर्णाहुति पर सम्पन्न यह दिव्य कन्या-पूजन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि सनातन संस्कृति के उस शाश्वत संदेश का जीवन्त उद्घोष था कि सम्पूर्ण सृष्टि शक्ति की अभिव्यक्ति है, सम्पूर्ण जीवन मातृचेतना का विस्तार है और परमात्मा तक पहुँचने का मार्ग श्रद्धा, सेवा, समर्पण तथा आदिशक्ति पराम्बा के प्रति निष्कलुष भक्ति से होकर ही प्रशस्त होता है।
इसी दिव्य अनुभूति के साथ श्री हरिहर आश्रम एक बार पुनः शक्ति-साधना, वैदिक संस्कृति, नारी-गरिमा, लोकमंगल और आध्यात्मिक जागरण का अनुपम केन्द्र बनकर श्रद्धालुओं के हृदय में आदिशक्ति की करुणा, भक्ति और दिव्य चेतना का अमिट आलोक अंकित कर गया।
