विवेक त्रिपाठी स्टेट हेड चाणक्य न्यूज इंडिया उत्तराखंड 806 दिन… 18,554 किलोमीटर… और एक अटूट संकल्प। उत्तराखंड के बेटे चंदू कार्की ने पैदल यात्रा कर रच दिया इतिहास
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की बेरीनाग तहसील के मानीखेत गांव से निकले 23 वर्षीय चंदू कार्की ने वह कर दिखाया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं है। उन्होंने 806 दिनों में 18,554 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर एक नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया है। यह सफर सिर्फ दूरी तय करने का नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, आस्था और विविधता को अपने कदमों से महसूस करने का था।
चंदू ने 19 सितंबर 2023 को अपने गांव से अखिल भारतीय पदयात्रा की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने भारत के लगभग सभी प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की यात्रा की। रास्ते में उन्होंने देश की संस्कृति, परंपराओं, लोगों के जीवन और प्राकृतिक सुंदरता को बेहद करीब से जाना और अपने अनुभवों को लाखों लोगों तक पहुंचाया।
उनकी यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में चारधाम की पदयात्रा, भारत के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, हरिद्वार से उज्जैन महाकालेश्वर तक पैदल कांवड़ यात्रा और हरिद्वार से नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर तक पैदल कांवड़ यात्रा शामिल हैं। यह यात्राएं केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी बेहद कठिन मानी जाती हैं।
लेकिन यह सफर बिल्कुल आसान नहीं था। कई बार उन्हें ऐसे सुनसान रास्तों से गुजरना पड़ा, जहां दो-दो और तीन-तीन दिनों तक कोई गांव या बाजार नहीं मिलता था। कई दिन ऐसे भी आए जब सिर्फ बिस्कुट और पानी के सहारे उन्हें अपनी यात्रा जारी रखनी पड़ी। फिर भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने कदम रुकने नहीं दिए।
चंदू का कहना है कि इस यात्रा का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं था, बल्कि भारत और नेपाल की संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और लोगों के जीवन को समझना और उन अनुभवों को दुनिया तक पहुंचाना था। आज वे अपने यात्रा अनुभव सोशल मीडिया के माध्यम से लाखों लोगों के साथ साझा कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पूरे सफर के दौरान देशभर के लोगों ने उन्हें भरपूर प्यार और अपनापन दिया। अगर किसी एक राज्य का नाम लेना हो तो गुजरात उनके लिए सबसे यादगार रहा। वहीं हरिद्वार से नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर तक की पैदल कांवड़ यात्रा उनके जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण और रोमांचक अनुभव रही।
अब चंदू कार्की का सपना यहीं नहीं रुकता। उनका लक्ष्य आने वाले समय में भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग देशों में भी बड़े एडवेंचर अभियान और प्रेरणादायक यात्राएं करना है। उन्होंने सरकार और संबंधित विभागों से ऐसे साहसिक अभियानों को बढ़ावा देने की भी अपील की है।
उत्तराखंड के इस युवा ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो मंजिल कितनी भी दूर क्यों न हो, कदम उसे हासिल कर ही लेते हैं। चंदू कार्की की यह उपलब्धि हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को हकीकत में बदलने का साहस रखता है। 🇮🇳
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