एक किसान की गुहार पर अब भी नहीं लगा विराम, जमीन के रिकॉर्ड को लेकर वर्षों से भटक रहा छक्कनदास राजस्व अभिलेख से जुड़ा मामला पुलिस तक पहुंचा, शिकायतों के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
बलौदाबाजार। शासन द्वारा आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए लगातार जनसुनवाई और शिकायत निवारण की व्यवस्था संचालित की जा रही है। इसके बावजूद ग्राम तुरमा निवासी किसान छक्कनदास मनहरे का जमीन से जुड़ा मामला लंबे समय से समाधान की प्रतीक्षा में है। किसान का आरोप है कि सीलिंग भूमि से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज अथवा राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जिसे लेकर वह लगातार संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख रहा है।
बताया जा रहा है कि किसान ने अपने मामले को लेकर राजस्व विभाग के विभिन्न स्तरों से लेकर जिला प्रशासन तक कई बार आवेदन प्रस्तुत किए हैं। शिकायतों का सिलसिला तहसील स्तर से शुरू होकर अनुविभागीय अधिकारी, कलेक्टर सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच चुका है। किसान का कहना है कि लगातार आवेदन देने के बावजूद उसे अब तक ऐसी ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी, जिससे उसके मामले का अंतिम समाधान हो सके।
अधिकारियों के बदलने के बाद भी स्थिति जस की तस
मामले की एक महत्वपूर्ण बात यह भी सामने आ रही है कि इस दौरान जिले में कई प्रशासनिक अधिकारी बदले, लेकिन किसान की समस्या अपने स्थान पर बनी हुई है। यही वजह है कि अब यह मामला केवल एक व्यक्ति की शिकायत तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि शिकायत निवारण की प्रशासनिक व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
किसान के अनुसार उसने अपनी समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए और अलग-अलग कार्यालयों में दस्तक दी। आवेदन देने की संख्या भी काफी अधिक हो चुकी है। बावजूद इसके, उसे अभी तक स्पष्ट और अंतिम निर्णय का इंतजार है।
पुलिस के पास पहुंचा रिकॉर्ड से जुड़ा मामला
सीलिंग भूमि के रिकॉर्ड के कथित रूप से गायब होने को लेकर किसान ने पुलिस प्रशासन का भी दरवाजा खटखटाया है। जानकारी के अनुसार इस संबंध में पुलिस अधीक्षक कार्यालय से ग्रामीण थाना स्तर पर जांच के लिए पत्राचार भी हुआ है। किसान का आरोप है कि जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद अब तक मामले में अपराध दर्ज होने जैसी कार्रवाई नहीं हुई है।
ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि यदि किसी सरकारी जमीन अथवा राजस्व अभिलेख से संबंधित रिकॉर्ड में वास्तव में अनियमितता हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है और रिकॉर्ड आखिर कहां गया? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा।
कलेक्टर के निर्देशों के पालन पर भी उठे सवाल
किसान ने कलेक्टर जनदर्शन में भी अपनी बात रखते हुए संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा उच्च अधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया है। किसान की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष समीक्षा कर यह निर्धारित किया जाए कि अब तक उसके मामले में क्या-क्या कार्रवाई हुई और किन कारणों से अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंचा जा सका।
अब निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि प्रशासन इस पुराने मामले की पूरी फाइल की समीक्षा कर संबंधित रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट करता है और जिम्मेदारी तय करते हुए नियमानुसार निर्णय लेता है, तो लंबे समय से समाधान की प्रतीक्षा कर रहे किसान को राहत मिल सकती है।
फिलहाल मामला जांच और दस्तावेजों की पड़ताल के बीच है। किसान की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभागीय जांच के निष्कर्ष के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
चाणक्य न्यूज़ इंडिया
हिमांशु शुक्ला | बलौदाबाजार-भाटापारा
