स्लग: ब्रज से मिथिला तक बही भक्ति की धारा, सियाराम विवाह कथा महोत्सव का हुआ भव्य समापन*

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कर इंट्रो

ब्रजभूमि गोवर्धन की पावन गिरिराज तलहटी में सात दिनों तक भक्ति, प्रेम और विवाह माधुरी का ऐसा संगम बहा कि श्रद्धालु कभी जनकपुरी में स्वयंवर देख रहे थे तो कभी अयोध्या की बारात के साक्षी बन रहे थे। श्री द्वारिकेश प्रभु के मंगल पाटोत्सव के अवसर पर आयोजित श्री सीताराम विवाह कथा महोत्सव का भव्य समापन हुआ। देखिए यह खास रिपोर्ट।

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कभी भावों के बीच जनकपुरी की चौखट सजी, कभी अयोध्या की तरह बारात निकली, कभी संतों की वाणी से भक्ति का अमृत बरसा और कभी मिथिला के विवाह गीतों ने श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं। सात दिवसीय श्रीराम कथा (मिथिला रस चर्चा) महोत्सव का समापन ऐसा हुआ, जिसने हजारों श्रद्धालुओं के हृदय में सियाराम प्रेम की अमिट छाप छोड़ दी। श्री द्वारिकेश प्रभु के मंगल पाटोत्सव में आयोजित मिथिला रस चर्चा का समापन गुरुवार को भक्ति भाव के साथ हो गया, लेकिन कथा के साथ बहा प्रेम, वात्सल्य और विवाह माधुरी का रस श्रद्धालुओं की स्मृतियों में लंबे समय तक जीवित रहेगा।

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नगर की भागवत चिंतन समिति द्वारा ब्रजभूमि गोवर्धन में श्री द्वारिकेश प्रभु के मंगल पाटोत्सव के अवसर पर श्री गिरिराज तलहटी में आयोजित श्रीराम कथा (मिथिला रस चर्चा) महोत्सव में नगर के नौलखी खालसा श्री महंत परम वीतरागी संत श्रीमहंत राम मनोहर दास जी महाराज के श्रीमुख से सात दिवसीय श्री सीताराम विवाह (मिथिला रस चर्चा) प्रवाहित कथा ने श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम, मर्यादा और समर्पण के दिव्य भावों से सराबोर रखा। पूरे कथा महोत्सव में मिथिला रस की अनूठी परंपरा केंद्र में रही। कथा के विभिन्न प्रसंगों में माता जानकी की करुणा, राजा जनक का वात्सल्य, अयोध्या की मर्यादा और प्रभु श्रीराम के आदर्श चरित्र का ऐसा भावपूर्ण वर्णन हुआ कि श्रद्धालु स्वयं को कभी जनकपुरी तो कभी अयोध्या के उत्सवों का सहभागी अनुभव करने लगे। विशेष रूप से सियाराम विवाह प्रसंग ने कथा को भावों की चरम ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।

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महोत्सव के आयोजक भगवत चिंतन मिशन के संस्थापक अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक पंडित डॉ अभिषेक कृष्ण शास्त्री ने बताया कि महोत्सव के दौरान पूरे समय देश के विभिन्न भागों से पधारे संत-महात्माओं का सान्निध्य श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। ब्रज की उत्सव मूर्ति रसिया बाबा महाराज, विश्वविख्यात कथावाचक संजीव कृष्ण ठाकुर महाराज, शमशाबाद भगवान रामदेव मंदिर के पीठाधिश्वर पंडित गौरीशंकर महाराज, मानस रत्न पूज्य अशोक दास रामायणी, भागवताचार्य राजू भैया, संगीताचार्य प्रथमेश गोस्वामी (लड्डू जी), रासाचार्य स्वामी रामवल्लभ,धन्वंतरि दास महाराज, राघवेन्द्र दास महाराज,श्यामलदास महाराज तथा अयोध्या धाम से पधारे श्रीमहंत जटापाल बाबा सहित अनेक संतों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से आयोजन को आध्यात्मिक ऊंचाइयां प्रदान कीं। पूरे कथा महोत्सव की विशेषता केवल कथा नहीं रही, बल्कि मिथिला की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत दर्शन भी रहा। समापन सत्रों में ध्रुपद, धमार और ठुमरी गायकी के विद्वान संगीताचार्य पंडित कामोद मिश्र एवं उनके सहयोगियों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक मिथिला विवाह गीतों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। मंगल गीतों की स्वर लहरियों के बीच ऐसा लगा मानो सातों दिन स्वयं जनकपुरी का विवाह उत्सव गिरिराज तलहटी में साकार हो उठा हो। पूरे आयोजन के दौरान प्रतिदिन मिथिला की लोक परंपरा, विवाह संस्कार, संगीत और भक्ति संस्कृति का भी सजीव दर्शन श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। कथा स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और संस्कृति का ऐसा संगम दिखाई दिया, जिसने ब्रज और मिथिला की आध्यात्मिक परंपराओं को एक सूत्र में पिरो दिया। संतों ने अपने संदेशों में सनातन संस्कृति, गौसेवा, भक्ति, परिवार और संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। समापन अवसर पर आरती, संत वंदन और आशीर्वचनों के बीच श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण विदाई दी।वेंद्र रघुवंशी, जिला ब्यूरो विदिशा

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