महाराष्ट्र/पुणे:-​मानवता, करुणा और निस्वार्थ सेवा की मिसाल पेश करते हुए पुणे के निकट स्थित ‘महेर’ संस्था ने समाज के वंचित, बेसहारा और शोषित वर्ग के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगाई है। सिस्टर लूसी कुरियन द्वारा वर्ष 1997 में स्थापित यह संस्था आज हजारों महिलाओं, अनाथ बच्चों और एकाकीपन का सामना कर रहे बुजुर्गों के लिए एक सुरक्षित मायका (महेर) बन चुकी है। ​

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​संकल्प की शुरुआत: एक दर्दनाक घटना से उपजा विचार।
​सिस्टर लूसी कुरियन के इस सेवा अभियान की नींव एक अत्यंत हृदयविदारक घटना के बाद पड़ी। उन्होंने एक ऐसी गर्भवती महिला को देखा जो घरेलू हिंसा से पीड़ित थी और सुरक्षित आश्रय की तलाश में भटकते हुए अंततः काल का ग्रास बन गई। इस घटना ने सिस्टर लूसी को अंदर तक झकझोर दिया। उन्होंने समाज की इस कमी को दूर करने का संकल्प लिया, जिसके परिणामस्वरूप ‘महेर’ संस्था का जन्म हुआ। बिना किसी भव्य भवन या बड़े आर्थिक संसाधनों के, केवल अटूट विश्वास के बल पर इस अभियान की शुरुआत हुई।
​जाति और धर्म से ऊपर: मानवता ही सर्वोपरि
​’महेर’ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सर्वसमावेशी विचारधारा है। यहाँ आने वाले किसी भी व्यक्ति से उसकी जाति, धर्म, भाषा या अतीत के बारे में नहीं पूछा जाता। संस्था का एकमात्र ध्येय संकट में पड़े व्यक्ति की सहायता करना है। मराठी भाषा में ‘महेर’ का अर्थ ‘मायका’ होता है, और यह संस्था अपने नाम को सार्थक करते हुए हर पीड़ित को बिना किसी शर्त के सुरक्षा, सम्मान और अपनत्व प्रदान करती है।
​पुनर्वास और स्वावलंबन के मुख्य बिंदु:
​कौशल विकास: आश्रित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न व्यावसायिक कौशलों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
​बाल शिक्षा: अनाथ और उपेक्षित बच्चों के लिए उत्कृष्ट शिक्षा और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाता है।
​बुजुर्गों की देखभाल: एकाकी जीवन जी रहे वरिष्ठ नागरिकों को जीवन के अंतिम पड़ाव में सम्मानजनक और प्रेमपूर्ण माहौल दिया जाता हैhttps://youtu.be/W7ndriWTJQg
​अनुशासित प्रबंधन: संस्था का संचालन केवल संवेदनाओं पर नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामुदायिक विकास के अनुशासित सिद्धांतों पर आधारित है।
​वैश्विक पहचान और सर्वोच्च पुरस्कार
​सिस्टर लूसी कुरियन को उनके इस अद्वितीय सामाजिक योगदान के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। हालांकि, सिस्टर लूसी का मानना है कि उनके लिए वास्तविक पुरस्कार किसी पदक में नहीं, बल्कि किसी पीड़ित महिला के चेहरे पर लौटा आत्मविश्वास और किसी डरे हुए बच्चे की मुस्कान में निहित है।
​”इंसानियत की सबसे सुंदर इमारत ईंट और पत्थरों से नहीं, बल्कि करुणा, सम्मान और प्रेम से बनती है। महेर केवल एक आश्रय गृह नहीं, बल्कि बिखर चुके परिवारों को फिर से जोड़ने वाला एक जीवंत घर है।”
​आज के आधुनिक और तकनीकी युग में, जहाँ मानवीय संवेदनाएं कम हो रही हैं, सिस्टर लूसी कुरियन और ‘महेर’ का यह प्रयास समाज के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा है। यह संस्था प्रमाणित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और करुणा से समाज में एक बड़ा और सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। संवादाता सफीक

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